देश के माल परिवहन ढांचे में बड़ा बदलाव लाते हुए 2,843 किलोमीटर लंबा डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) नेटवर्क पूरी क्षमता के साथ लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी को मजबूत कर रहा है। पूर्वोत्तर सीमा रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिंजल किशोर शर्मा के अनुसार, इस नेटवर्क से मालगाड़ियों की गति और समय-पालन में सुधार हुआ है। साथ ही, पारंपरिक रेल नेटवर्क पर यात्री ट्रेनों के परिचालन को भी अधिक सुगम बनाने में मदद मिल रही है।
DFC नेटवर्क में 1,337 किलोमीटर लंबा ईस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर शामिल है, जो पंजाब के न्यू सानेहवाल से बिहार के न्यू सोननगर तक फैला है। इसमें बिहार का करीब 99 किलोमीटर हिस्सा शामिल है। वहीं, 1,506 किलोमीटर लंबा वेस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के न्यू दादरी से महाराष्ट्र के JNPT बंदरगाह तक है। 31 मार्च 2026 को वैतरणा से JNPT सेक्शन पूरा होने के साथ ही पूरा वेस्टर्न DFC भी चालू हो गया।
कुल रेल नेटवर्क के महज करीब 4 प्रतिशत हिस्से में फैला DFC देश के कुल रेल माल परिवहन का 14 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संभाल रहा है। 31 अगस्त 2026 तक इस नेटवर्क पर करीब 5.21 लाख ट्रेन फेरों का परिचालन हुआ, यानी प्रतिदिन औसतन लगभग 435 ट्रेनें चलीं। वर्ष 2025-26 के दौरान DFC के जरिए माल परिवहन में 13.74 प्रतिशत की वृद्धि भी दर्ज की गई।
बिहार और पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए DFC नेटवर्क को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे खाद्यान्न, खाद, पेट्रोलियम, कोयला, सीमेंट और कंटेनर कार्गो जैसी आवश्यक सामग्रियों की आपूर्ति तेज और अधिक सुचारु होने की उम्मीद है। वहीं, पूर्वोत्तर और सीमावर्ती क्षेत्रों की चाय, बागवानी उत्पाद, प्रोसेस्ड फूड और अन्य जल्द खराब होने वाली वस्तुओं को देश के बड़े उपभोक्ता बाजारों और बंदरगाहों तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।
लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में भी DFC की अहम भूमिका बताई जा रही है। गति शक्ति कार्गो टर्मिनल, डिजिटल फ्रेट मैनेजमेंट और ‘ट्रक-ऑन-ट्रेन’ जैसी सुविधाओं के जरिए माल ढुलाई को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे सड़क परिवहन पर दबाव, डीजल की खपत और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा, बेहतर माल परिवहन नेटवर्क से लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। घरेलू निवेश के साथ प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में वृद्धि होने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। ऐसे में DFC नेटवर्क बिहार और पूर्वोत्तर के व्यापार, कृषि और औद्योगिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचे के रूप में उभर रहा है।





