बसंतराय थाना क्षेत्र के बाघाकोल गांव में साइबर अपराध के खिलाफ गोड्डा पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर पुलिस ने मो. जुबेर आलम नामक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर ऑनलाइन साइबर ठगी और अवैध वित्तीय लेन-देन में संलिप्त होने का आरोप है। पुलिस ने उसके पास से मोबाइल, विभिन्न बैंकों के डेबिट कार्ड और अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं। आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
बसंतराय: साइबर ठगी के नेटवर्क का भंडाफोड़, पुलिस ने दबोचा आरोपी; कई डिजिटल साक्ष्य बरामद
बसंतराय: जिले में साइबर अपराधों पर नकेल कसने के लिए गोड्डा पुलिस लगातार सख्त कदम उठा रही है। इसी क्रम में बसंतराय थाना क्षेत्र के बाघाकोल गांव में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने साइबर ठगी में संलिप्त एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधीक्षक को मिली गोपनीय सूचना के बाद बसंतराय थाना प्रभारी रामदेव वर्मा के नेतृत्व में एक विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया, जिसने सफलतापूर्वक बाघाकोल निवासी मो. जुबेर आलम, पिता शकील अहमद को धर दबोचा।
ठगी का तरीका और डिजिटल साक्ष्य
प्राथमिक जांच में यह सामने आया है कि आरोपी साइबर ठगी से प्राप्त अवैध धनराशि को ठिकाने लगाने और उसे स्थानांतरित करने के लिए संगठित तरीके से काम कर रहा था। आरोपी के पास से बरामद दस्तावेजों और उपकरणों में एक मोबाइल फोन, इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक का पासबुक, बैंक ऑफ बड़ौदा और भारतीय स्टेट बैंक के डेबिट कार्ड, [Aadhaar Redacted] एवं पैन कार्ड शामिल हैं। पूछताछ के दौरान यह खुलासा हुआ कि आरोपी टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करके निवेश संबंधी संदिग्ध एप डाउनलोड करता था और उन्हीं के माध्यम से यूपीआई प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर फंड ट्रांसफर करता था।
मनी लॉन्ड्रिंग जैसा तौर-तरीका
पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी से प्राप्त राशि को छिपाने के लिए आरोपी बेहद शातिर तरीके अपनाता था। वह विभिन्न बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके पैसे को इधर-उधर स्थानांतरित करता था ताकि अपराध की आय के स्रोत का पता न चल सके। यह पैटर्न दर्शाता है कि आरोपी किसी बड़े साइबर नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है, जो आम लोगों को फर्जी ऑनलाइन ऑफर और निवेश योजनाओं के नाम पर ठगी का शिकार बनाता है।
कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच
इस मामले में बसंतराय थाना कांड संख्या 40/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस अब आरोपी से बरामद डिजिटल साक्ष्यों की तकनीकी गहनता से जांच कर रही है ताकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित आरोपियों को भी बेनकाब किया जा सके। छापेमारी दल में थाना प्रभारी रामदेव वर्मा, विजय कुमार शर्मा, आरक्षी राजीव कुमार सिंह, गौतम कुमार सोरेन और तकनीकी शाखा के कुशल कर्मी शामिल थे।
प्रशासन की चेतावनी: सचेत रहें, सुरक्षित रहें
साइबर अपराध की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से फिर से अपील की है। प्रशासन ने कहा है कि लोग किसी भी अज्ञात व्यक्ति द्वारा बताए गए निवेश एप, लुभावने फर्जी ऑनलाइन ऑफर या संदिग्ध लिंक पर भरोसा न करें। किसी भी प्रकार का वित्तीय लेन-देन सोच-समझकर ही करें। यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार होता है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या अपने नजदीकी थाने में सूचित करें।
पुलिस का यह कदम अपराधियों में डर पैदा करने और साइबर अपराध पर लगाम लगाने की दिशा में एक प्रभावी प्रयास है। क्षेत्र में इस गिरफ्तारी की चर्चा जोरों पर है और लोग प्रशासन के इस त्वरित कार्रवाई की सराहना कर रहे हैं।



