बिहार मंत्रिपरिषद की बैठक में 43 प्रस्तावों को मंजूरी, कृषि, शिक्षा, बिजली, सिंचाई और आधारभूत ढांचे पर अहम फैसले

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पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के समग्र विकास से जुड़े कुल 43 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक के बाद कैबिनेट विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने मंत्रिपरिषद के निर्णयों की विस्तृत जानकारी दी।

 

अरविंद चौधरी ने बताया कि कृषि विभाग के अंतर्गत विभिन्न कार्यालयों में स्वीकृत 293 पदों के समर्पण और प्रत्यर्पण के बाद बिहार कृषि अधीनस्थ सेवा संवर्ग-05 (पौधा संरक्षण) के तहत 194 पौधा संरक्षण पर्यवेक्षक एवं 99 पौधा संरक्षण निरीक्षक पदों का सृजन किया गया है। इस प्रकार कुल 694 पदों के पुनर्गठन और सृजन को मंत्रिपरिषद की स्वीकृति मिली है। इसके अतिरिक्त विभागीय परियोजनाओं के त्वरित कार्यान्वयन तथा वन एवं पर्यावरण से जुड़े मामलों के समाधान के लिए वन एवं पर्यावरण सलाहकार के एक गैर-संवर्गीय पद के तीन वर्षों के लिए अस्थायी सृजन को भी मंजूरी दी गई।

 

उन्होंने बताया कि विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के एक पूर्व स्वीकृत्यादेश में संशोधन करते हुए “कस्ट्यूम डिजाइन एंड ड्रेस मेकिंग टेक्नोलॉजी” के स्थान पर “कम्प्यूटर एडेड कस्ट्यूम डिजाइन एंड ड्रेस मेकिंग” पदनाम को स्वीकृति दी गई है। साथ ही नवस्वीकृत राजकीय पॉलिटेकनिक, बगहा (पश्चिम चंपारण) के लिए 45 शैक्षणिक एवं 61 गैर-शैक्षणिक पदों सहित कुल 106 पदों के सृजन को भी मंजूरी प्रदान की गई है।

 

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि वर्ष 1973 में हुए बाणसागर समझौते के तहत अविभाजित बिहार को 7.75 मिलियन एकड़ फीट जल का आवंटन प्राप्त हुआ था। वर्ष 2000 में राज्य विभाजन के बाद झारखंड द्वारा जल बंटवारे की मांग किए जाने के कारण बिहार की इंद्रपुरी जलाशय परियोजना प्रभावित हो रही थी। उन्होंने कहा कि 10 जुलाई 2025 को रांची में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में दोनों राज्यों के बीच सहमति बनी कि 7.75 मिलियन एकड़ फीट जल में से 5.75 मिलियन एकड़ फीट बिहार को तथा 2.00 मिलियन एकड़ फीट झारखंड को मिलेगा। इस सहमति के प्रारूप को मंत्रिपरिषद ने स्वीकृति प्रदान कर दी है।

 

अरविंद चौधरी ने कहा कि इस निर्णय से वर्षों से लंबित इंद्रपुरी जलाशय परियोजना के कार्य का मार्ग प्रशस्त होगा और भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, पटना, गया एवं अरवल जिलों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

 

मंत्रिपरिषद ने पटना शहर में भूमिगत केबलिंग के माध्यम से निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की परियोजना को भी मंजूरी दी है। इस योजना पर 653 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके तहत पेसू के अंतर्गत 13 प्रमंडलों में अंडरग्राउंड केबलिंग के जरिए बिजली आपूर्ति की जाएगी।

 

इसके अलावा वर्ष 2025-26 के लिए 789 माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक सरकारी विद्यालयों के लिए 14 अरब 85 करोड़ 50 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस राशि से पीएम श्री योजना के अंतर्गत चयनित विद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप कक्षा 6ठी से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए आधुनिक शिक्षण कौशल, नवाचार एवं तकनीकी साक्षरता को बढ़ावा दिया जाएगा।

 

अरविंद चौधरी ने बताया कि बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के अंतर्गत इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (आईएमसी), गयाजी के लिए 220 केवी डीसी संचरण लाइन के निर्माण को भी मंजूरी दी गई है। यह लाइन 400/220/132 केवी चंदौती ग्रिड उपकेंद्र से आईएमसी, गयाजी तक बनाई जाएगी, जिस पर 33.29 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

 

मंत्रिपरिषद ने संवाहक अनुज्ञप्ति (कंडक्टर लाइसेंस) निर्गमन के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता को दसवीं पास से घटाकर आठवीं पास करने के लिए बिहार मोटरगाड़ी नियमावली, 1992 में संशोधन को भी स्वीकृति दी है।

 

इसके अतिरिक्त मत्स्य निदेशालय के अधीन कार्यालय परिचारी संवर्ग के 200 स्वीकृत पदों के कार्यालयवार चिन्हितीकरण एवं पुनर्गठन, बिहार कार्यपालिका (संशोधन) नियमावली, 2025 को घटनोत्तर स्वीकृति तथा आनंद विवाह अधिनियम के अंतर्गत “बिहार आनंद कारज विवाह निबंधन नियमावली, 2025” को भी मंजूरी प्रदान की गई है।

 

मंत्रिपरिषद ने बिहार भवन, मुंबई के निर्माण कार्य के लिए 314.20 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी है। वहीं जन शिक्षा निदेशालय के स्तर पर योजनाओं के बेहतर संचालन के लिए आठ मरणशील पदों के समर्पण और नौ नए पदों के सृजन को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।

 

खरीफ विपणन मौसम 2025-26 एवं रबी विपणन मौसम 2026-27 में अधिप्राप्ति कार्य के लिए बिहार राज्य सहकारी बैंक को राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, नाबार्ड एवं अन्य वित्तीय संस्थानों से 7000 करोड़ रुपये तक ऋण लेने तथा इस पर राजकीय गारंटी देने का निर्णय लिया गया है।

 

इसके साथ ही दरभंगा हवाई अड्डा के समीप लॉजिस्टिक पार्क एवं कार्गो हब के निर्माण के लिए चिन्हित 50.0004 एकड़ भूमि के अधिग्रहण के लिए 138 करोड़ 82 लाख 88 हजार रुपये की मुआवजा राशि को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।

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Author: kelanchaltimes

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