
पाकुड़। जिले में मोहर्रम का पर्व श्रद्धा, अनुशासन और गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश करते हुए शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक विभिन्न अखाड़ों और ताजिया कमेटियों द्वारा पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाले गए, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। पूरे आयोजन के दौरान आपसी भाईचारा, सौहार्द और सामाजिक एकता की अनूठी मिसाल देखने को मिली।
मोहर्रम के अवसर पर शहर के विभिन्न मार्गों से निकले ताजिया जुलूस निर्धारित मार्गों से होते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचे। जुलूस के दौरान अखाड़ों के युवाओं और बच्चों ने लाठी, तलवार, डंडा एवं पारंपरिक युद्ध कलाओं का शानदार प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
विधि-व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचे अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी कुमार गौरव ने कहा कि जिले में मोहर्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी समुदायों के लोग मिल-जुलकर भाईचारे के साथ इस अवसर को मना रहे हैं, जो जिले की सामाजिक एकता को दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। सभी ताजिया कमेटियों को सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही स्पष्ट किया गया था कि नशे की हालत में किसी भी व्यक्ति को जुलूस अथवा मोहर्रम से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
समाजसेवी हाजी तनवीर आलम ने कहा कि मोहर्रम कोई उत्सव नहीं, बल्कि त्याग, बलिदान और इंसानियत का संदेश देने वाला पवित्र अवसर है। उन्होंने कहा कि कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन ने सत्य, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनका जीवन आज भी पूरी दुनिया को अन्याय के खिलाफ संघर्ष करने और इंसानियत के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है।
शहर के मुख्य ताजिया चौक पर देर शाम तक लोगों की भारी भीड़ जुटी रही। विभिन्न अखाड़ों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक करतबों और अनुशासित जुलूस ने लोगों को प्रभावित किया। जुलूस में शामिल लोग मजहबी नारों के साथ शांतिपूर्वक आगे बढ़ते रहे।
मोहर्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी। जुलूस मार्गों पर पुलिस अधिकारी, दंडाधिकारी, लाठीधारी बल और त्वरित कार्रवाई दल लगातार निगरानी करते रहे।
प्रशासन की मुस्तैदी, ताजिया कमेटियों के सहयोग और आम लोगों के भाईचारे की बदौलत जिले में मोहर्रम का पर्व बिना किसी अप्रिय घटना के शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

