श्रीमद्भागवत कथा में शिव-पार्वती विवाह प्रसंग सुन श्रद्धालु भाव-विभोर, गूंजा भक्ति और आस्था का संदेश

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महागामा के कोयला गांव में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा वाचिका साध्वी खुशी किशोरी ने तप, त्याग, समर्पण और सच्ची भक्ति का महत्व बताया। कथा सुनने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। आयोजन समिति के अनुसार धार्मिक आयोजन से क्षेत्र में आध्यात्मिक जागरूकता और सांस्कृतिक चेतना का प्रसार हो रहा है।

 

 

महागामा। प्रखंड अंतर्गत हनवारा थाना क्षेत्र के कोयला गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन रविवार की शाम श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा पंडाल में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालु भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह प्रसंग का श्रवण कर भाव-विभोर हो उठे।
कथा वाचिका साध्वी खुशी किशोरी ने भगवान शिव एवं माता पार्वती के विवाह प्रसंग का अत्यंत मार्मिक और भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। उनकी अटूट श्रद्धा, दृढ़ निश्चय और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया और दिव्य विवाह संपन्न हुआ।
साध्वी खुशी किशोरी ने कहा कि शिव-पार्वती विवाह केवल धार्मिक कथा नहीं, बल्कि तपस्या, त्याग, धैर्य, समर्पण और सच्ची भक्ति का जीवंत संदेश है। यह प्रसंग मनुष्य को जीवन में सकारात्मक सोच, संयम और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति सच्चे मन से ईश्वर की आराधना करता है, उसके जीवन की कठिन राहें भी सरल हो जाती हैं।
कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए। भगवान शिव और माता पार्वती के जयकारों से पूरा कथा पंडाल गूंज उठा। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।
अपने प्रवचन में कथावाचिका ने धर्म, भक्ति, सदाचार और नैतिक मूल्यों के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ में मनुष्य आध्यात्मिक मूल्यों से दूर होता जा रहा है। ऐसे समय में धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में संस्कार, नैतिकता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता है।
कोयला गांव सहित आसपास के कई गांवों से श्रद्धालु कथा सुनने पहुंचे। श्रद्धालुओं ने कथा के दौरान भजन-कीर्तन में भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे आयोजन स्थल पर भक्तिमय वातावरण बना रहा और लोगों ने कथा को अत्यंत प्रेरणादायक बताया।
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि कथा के प्रत्येक दिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। कथा के माध्यम से लोगों में धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना का विकास हो रहा है तथा नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
समिति ने सभी श्रद्धालुओं से आगामी दिनों में भी कथा में शामिल होकर आध्यात्मिक ज्ञान एवं धार्मिक लाभ प्राप्त करने की अपील की। आयोजन की सफलता में ग्रामीणों और समिति सदस्यों की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

rohini shree
Author: rohini shree

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