जदयू : प्रदेश प्रवक्ता श्रीमती अंजुम आरा ने 70वीं बीपीएससी परीक्षा के अंतिम परिणाम में 745 महिला अभ्यर्थियों के चयन पर खुशी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर महिलाओं की यह सफलता, सरकारी नौकरियों में महिलाओं को तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार सरकार द्वारा दिया गया 35 प्रतिशत आरक्षण और सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है।बिहार में महिलाओं को समाज और प्रशासन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए पूर्व की माननीय श्री नीतीश कुमार की सरकार ने जो वातावरण तैयार किया, उसी का परिणाम है कि आज बड़ी संख्या में महिलाएं प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर रही हैं और नेतृत्वकारी भूमिकाओं में अपनी जगह बना रही हैं। सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत बीपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में सफल महिला अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई जाती है। इस वर्ष 1914 महिला अभ्यर्थियों को यह सहायता प्रदान की गई थी, जिनमें से 148 अभ्यर्थियों का अंतिम चयन हुआ है। यह इस बात का प्रमाण है कि आर्थिक सहयोग और संस्थागत समर्थन मिलने पर महिलाओं की प्रतिभा नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती है।
नीतीश कुमार ने हमेशा महिलाओं को विकास की मुख्यधारा में लाने को प्राथमिकता दी है। पंचायती राज और नगर निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण, सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत आरक्षण, जीविका समूहों के माध्यम से करोड़ों महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना, बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए साइकिल और पोशाक योजनाएं, तथा महिला सुरक्षा और सम्मान को केंद्र में रखकर बनाई गई अनेक योजनाएं आज सामाजिक परिवर्तन की मिसाल बन चुकी हैं। इसी सोच का विस्तार मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना भी है, जो महिलाओं को प्रशासनिक सेवाओं जैसे प्रतिष्ठित क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
महिला सशक्तिकरण केवल एक नारा नहीं, बल्कि सुशासन की आधारशिला है। बिहार में महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया में अधिक भागीदारी दिलाने के लिए माननीय नीतीश कुमार द्वारा किए गए कार्यों का सकारात्मक प्रभाव आज हर क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। 70वीं बीपीएससी परीक्षा में 745 महिला अभ्यर्थियों की सफलता इसी परिवर्तनकारी सोच का बेहतरीन उदाहरण है।


