केवीके बाढ़ में “खेत बचाओ अभियान” का भव्य शुभारंभ, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने का मिला संदेश

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बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र, बाढ़ में “खेत बचाओ अभियान” (1-30 जून 2026) का शुभारंभ कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने किया। कार्यक्रम में किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक खेती अपनाने और अपनी 25 प्रतिशत भूमि को प्राकृतिक खेती के लिए समर्पित करने की सलाह दी गई। इस अभियान में 268 किसानों ने भाग लेकर पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने का संकल्प लिया।

स्वस्थ मिट्टी, समृद्ध किसान: “खेत बचाओ अभियान” से बदलेगी कृषि तस्वीर

भागलपुर और पटना के किसानों के लिए कृषि के क्षेत्र में नई दिशा तय करने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), बाढ़ में “खेत बचाओ अभियान” का उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बी.ए.यू. सबौर के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने दीप प्रज्वलित कर अभियान की शुरुआत की। उन्होंने किसानों से मिट्टी जांच के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने की अपील की, ताकि रासायनिक खाद के अंधाधुंध उपयोग से मिट्टी को बचाकर उसकी उर्वरता को लंबे समय तक बरकरार रखा जा सके।

जैविक और प्राकृतिक खेती पर विशेष ध्यान

माननीय कुलपति ने किसानों को सुझाव दिया कि वे अपनी कुल कृषि भूमि के कम से कम 25% हिस्से में जैविक एवं प्राकृतिक खेती करें। इससे न केवल भूमि का स्वास्थ्य सुधरेगा, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन भी बना रहेगा।

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विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और तकनीकी सत्र

कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने विभिन्न पहलुओं पर किसानों को जागरूक किया:

  • डॉ. आर. एन. सिंह (सह निदेशक, प्रसार शिक्षा): रासायनिक खाद के बजाय जीवाणु खादों (Bio-fertilizers) के उपयोग पर बल दिया।

  • डॉ. एस. एन. दास (क्षेत्रीय निदेशक, कृषि अनुसंधान संस्थान): कम लागत में अधिक लाभ के लिए औषधीय एवं सुगंधित फसलों की खेती की सलाह दी।

  • डॉ. रीता सिंह (प्रधान वैज्ञानिक, केवीके बाढ़): जिले में चल रही किसान हितकारी योजनाओं की जानकारी साझा की।

  • तकनीकी सत्र: वैज्ञानिक राजीव कुमार ने उर्वरक उपयोग दक्षता (FUE) बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की, जबकि उद्यान वैज्ञानिक डॉ. पुष्पम पटेल ने कृषि वानिकी (Agroforestry) को अपनाने की सलाह दी।

सतत कृषि की ओर बढ़ते कदम

अभियान के इस उद्घाटन सत्र में कुल 268 पुरुष और महिला किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी ने टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल कृषि तकनीकों को अपनाने की शपथ ली। यह अभियान मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के कुशल उपयोग के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।

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Author: rohini shree

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