कटिहार जिले के मनिहारी नगर स्थित ऐतिहासिक पीर पर्वत पर बाबा जीतनशाह रहमतुल्लाअलैह की मजार वर्षों से आस्था, सद्भाव और धार्मिक एकता का प्रतीक बनी हुई है। लगभग 60 फीट ऊंचे इस पर्वत पर स्थित यह ऐतिहासिक दरगाह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यटन स्थल के रूप में भी अपनी अलग पहचान रखती है। यहां हर वर्ष बिहार सहित देश के विभिन्न राज्यों और नेपाल से बड़ी संख्या में श्रद्धालु व पर्यटक पहुंचते हैं।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस ऐतिहासिक मजार का निर्माण वर्ष 1338 ईस्वी में कराया गया था। बताया जाता है कि मनिहारी निवासी स्वर्गीय अतुल मुखर्जी ने बाबा से मन्नत मांगी थी। मन्नत पूरी होने के बाद उन्होंने अपने संकल्प के अनुसार मजार परिसर में भवन निर्माण कराया। तभी से यह स्थान लोगों की गहरी आस्था का केंद्र बन गया और यहां मन्नत मांगने की परंपरा आज भी जारी है।
मान्यता है कि श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने की कामना के साथ पत्थर के छोटे टुकड़ों को कपड़े में बांधकर यहां रखते हैं। मन्नत पूरी होने पर वे दोबारा मजार पर पहुंचकर चादरपोशी, प्रसाद और अन्य धार्मिक अर्पण करते हैं। यही कारण है कि यहां वर्षभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
इस मजार की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां हर जाति और हर धर्म के लोग बिना किसी भेदभाव के श्रद्धा के साथ आते हैं। प्रतिवर्ष 25वीं तारीख को उर्स मुबारक का आयोजन किया जाता है, जिसमें कव्वाली, जलसा और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। यह आयोजन सांप्रदायिक सौहार्द और सामाजिक एकता का संदेश देता है।
प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा पीर पर्वत उत्तर बिहार के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में भी गिना जाता है। यहां इमली, आम सहित अनेक प्रकार के विशाल वृक्ष मौजूद हैं। मजार परिसर के पीछे गुफानुमा संरचना और सामने स्थित मीठे पानी का कुआं श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। मान्यता है कि इस कुएं का पानी पीने से मानसिक शांति का अनुभव होता है।
मजार की देखरेख मो. सफीउद्दीन द्वारा की जाती है। वर्ष 2010 में राष्ट्रीय सम विकास योजना के तहत यहां सीढ़ियों, शेड और अन्य विकास कार्य कराए गए, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
सावन के महीने में इस स्थान की धार्मिक और प्राकृतिक छटा और भी मनमोहक हो जाती है। गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने पर नदी का प्रवाह पीर पर्वत के निकट पहुंच जाता है, जिससे यहां का दृश्य बेहद आकर्षक दिखाई देता है।
आज मनिहारी का यह ऐतिहासिक पीर पर्वत कटिहार, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, खगड़िया, भागलपुर के अलावा झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और नेपाल से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए प्रमुख आस्था एवं पर्यटन केंद्र बन चुका है। यहां लोग मन्नतें मांगने के साथ-साथ प्राकृतिक सुंदरता का भी भरपूर आनंद लेते हैं।





