दुमका में भाजपा के पूर्व सांसद सुनील सोरेन ने चैती छठ में किया दुग्ध वितरण, सभी समाज में बने प्रेरणा का स्रोत

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दुमका: झारखंड के दुमका में चैती छठ महापर्व की धूम मची हुई है। इस पावन अवसर पर भाजपा के पूर्व सांसद और कद्दावर समाजसेवी सुनील सोरेन ने श्रद्धालुओं के बीच दुग्ध वितरण कर सेवा भावना का परिचय दिया। पोखरा चौक स्थित समिति के सदस्यों द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने भाग लेकर समिति के कार्यों की सराहना की और उनके प्रति आभार व्यक्त किया।

आदिवासी बहुल क्षेत्र में दिखाया आस्था का प्रतीक

दुमका का आदिवासी बहुल इलाका धार्मिक आस्थाओं और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रमुख केंद्र है। इस क्षेत्र में चैती छठ पर्व का विशेष महत्व है। पर्व के दौरान हजारों श्रद्धालु निर्जला उपवास रखकर सूर्य देवता की उपासना करते हैं। ऐसे में सुनील सोरेन द्वारा किया गया दुग्ध वितरण समाज में एक सकारात्मक संदेश दे रहा है।

छठ महापर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और जनसेवा का प्रतीक भी है। इस पहल के माध्यम से सोरेन ने यह संदेश दिया कि सभी समुदायों को एकजुट होकर समाज सेवा में योगदान देना चाहिए।

कौन हैं सुनील सोरेन?

झारखंड की राजनीति में एक प्रमुख चेहरा, सुनील सोरेन का जन्म 4 फरवरी 1972 को हुआ था। वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य हैं और झारखंड विधानसभा से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत कर चुके हैं।

राजनीतिक सफर

सुनील सोरेन 2005 में झारखंड विधानसभा में जामा निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित हुए थे। इसके बाद उन्होंने 2014 में दुमका लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के दिग्गज नेता शिबू सोरेन से पराजित हो गए। इस चुनाव में शिबू सोरेन को 3,35,815 वोट (37.19%) मिले, जबकि सुनील सोरेन को 2,96,785 (32.86%) वोट प्राप्त हुए थे।

हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने जबरदस्त वापसी की और दुमका सीट से शिबू सोरेन को 47,590 वोटों के अंतर से हराया। इस चुनाव में सुनील सोरेन को 4,84,923 (47.26%) वोट मिले, जबकि शिबू सोरेन को 4,37,333 (42.63%) वोट प्राप्त हुए।

नरेंद्र मोदी के करीबी नेता

भाजपा के प्रमुख नेताओं में गिने जाने वाले सुनील सोरेन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी माने जाते हैं। उन्होंने हमेशा भाजपा के आदिवासी विकास एजेंडे को आगे बढ़ाने का कार्य किया है। उनकी विचारधारा और राजनीतिक रणनीति पार्टी के सिद्धांतों के अनुरूप रही है, जिससे वे संगठन में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

समाज सेवा में सक्रिय भूमिका

राजनीति से इतर, सुनील सोरेन सामाजिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। चाहे प्राकृतिक आपदाएं हों या कोई सामाजिक आंदोलन, वे हमेशा जनता के बीच उपस्थित रहते हैं। उनका मानना है कि जनप्रतिनिधि का असली कर्तव्य समाज की सेवा करना होता है, न कि केवल चुनावी राजनीति तक सीमित रहना।

धार्मिक और सामाजिक सौहार्द्र के पक्षधर

आज के दौर में जब समाज में कई तरह की वैमनस्यता फैलाने की कोशिश की जा रही है, ऐसे समय में सुनील सोरेन जैसे नेता एकता और सौहार्द्र का संदेश दे रहे हैं। वे मानते हैं कि राजनीति जाति, धर्म, संप्रदाय से ऊपर होनी चाहिए और देशहित को प्राथमिकता देनी चाहिए।

छठ महापर्व के दौरान उनका यह प्रयास यह दर्शाता है कि समाज सेवा और धार्मिक आस्था साथ-साथ चल सकती हैं। उनके इस कार्य से क्षेत्र के लोगों को प्रेरणा मिली है और यह संदेश गया है कि सेवा ही सच्ची राजनीति है।

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Author: gaytri

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