वीमेंस कॉलेज, कौशल्या ग्राम में आयोजित एक दिवसीय व्याख्यान में विशेषज्ञों ने कहा — प्रकृति से संतुलन ही जलवायु संकट से बचाव का रास्ता

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मधेपुरा । वीमेंस कॉलेज, कौशल्या ग्राम, मधेपुरा में मंगलवार को “जलवायु परिवर्तन: कारक एवं प्रभाव” विषय पर एक दिवसीय शैक्षणिक व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बीएन मंडल विश्वविद्यालय सहित विभिन्न संस्थानों के शिक्षकों, विशेषज्ञों और विद्यार्थियों ने भाग लिया। वक्ताओं ने पर्यावरणीय असंतुलन के कारणों पर प्रकाश डालते हुए समाधान के व्यावहारिक उपाय भी प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम का शुभारंभ बीएनएमयू के स्नातकोत्तर अर्थशास्त्र विभाग की सह-प्राध्यापक श्रीमती प्रज्ञा प्रसाद के उद्घाटन वक्तव्य से हुआ। उन्होंने कहा, “मानव जीवन और पर्यावरण का अटूट संबंध है। सीमित संसाधनों का संयमित उपयोग ही पर्यावरण संरक्षण की कुंजी है। हमारी छोटी-छोटी आदतें पृथ्वी के भविष्य को प्रभावित करती हैं।”

मुख्य वक्ता डॉ. मिथिलेश कुमार सिंह, विभागाध्यक्ष, भूगोल विभाग, बीएनएमयू, ने कहा कि “जलवायु परिवर्तन का प्रभाव केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, यह सामाजिक, आर्थिक और जैविक विविधता पर भी गहरा असर डालता है। पारिस्थितिक तंत्र आधारित समाधान जैसे—वनों की रक्षा, जल स्रोतों का संरक्षण और स्थानीय संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग—इस संकट से निपटने में कारगर हो सकते हैं।”

सहायक प्राध्यापक श्री अमित विश्वकर्मा ने कहा कि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में वृद्धि जीवाश्म ईंधनों के अत्यधिक प्रयोग और वनों की कटाई जैसे मानवीय कार्यों का परिणाम है। उन्होंने बताया कि “इससे वैश्विक तापमान में अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है, जो मौसमीय असंतुलन, बाढ़, सूखा और जैव विविधता के ह्रास का कारण बन रहा है।”

विशिष्ट अतिथि एवं संस्थापक डॉ. अशोक कुमार ने शिक्षा की भूमिका पर जोर देते हुए कहा, “शिक्षक समाज के दिशा-निर्देशक होते हैं। पर्यावरणीय चेतना के बीज सबसे पहले कक्षा में बोए जाने चाहिए। पाठ्यक्रम में पर्यावरण शिक्षा को मजबूत रूप से शामिल किया जाना चाहिए, ताकि छात्र-छात्राएं न केवल जागरूक बनें, बल्कि समाज में जागरूकता का प्रसार भी करें।”

कार्यक्रम संयोजक डॉ. अमरेश कुमार अमर, सहायक प्राध्यापक, अर्थशास्त्र विभाग ने कहा, “जलवायु परिवर्तन के दो प्रमुख कारक हैं—प्राकृतिक और मानवीय। परंतु वर्तमान संकट का मुख्य कारण मानवीय गतिविधियां हैं। उपभोक्तावादी संस्कृति से बाहर निकलकर हमें ‘3R’ — Reduce, Reuse, Recycle — की नीति को व्यवहार में लाना होगा।”

कार्यक्रम के अंत में डॉ. माधव कुमार ने सभी वक्ताओं, उपस्थितजनों और आयोजकों का आभार व्यक्त किया।

इस व्याख्यान में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे, जिनमें डॉ. नीलू, डॉ. काजल, डॉ. नीलू सिंह, डॉ. प्रिया, डॉ. रवीना, डॉ. उपासना, डॉ. प्रभात रंजन, डॉ. मुकेश, डॉ. कौशल, डॉ. ललन, डॉ. ब्रजेश कुमार मंडल, डॉ. विजेंद्र मेहता, डॉ. माधव, राहुल, जयश्री, अंकिता, खुशखुश, रजनी, मिनी, काजल, शबनम, पूनम, रितु, अनिल, प्रिंस आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे।

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Author: gaytri

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