कटिहार: जिले के आजमनगर प्रखंड अंतर्गत शीतलपुर पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय गढ़बैना सीमित संसाधनों और शिक्षकों की कमी के बावजूद गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुशासित शैक्षणिक वातावरण के लिए पहचान बना रहा है। विद्यालय में प्रतिदिन चेतना सत्र के तहत प्रार्थना, संविधान की प्रस्तावना, प्रेरक प्रसंग, अभियान गीत और राष्ट्रगान का आयोजन किया जाता है।
विद्यालय के छात्र-छात्राएं नियमित रूप से स्कूल ड्रेस में विद्यालय पहुंचते हैं और अनुशासित वातावरण में अध्ययन करते हैं। प्रधानाध्यापक श्रीधर पाण्डेय के नेतृत्व में विद्यालय के शैक्षणिक स्तर और आधारभूत संरचना में लगातार सुधार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विद्यालय में वर्तमान में 219 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं और कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई संचालित होती है।
प्रधानाध्यापक के अनुसार विद्यालय में कार्यरत शिक्षक तारिक अनवर, इकरामुल हक, साजिद आलम, अंजू यादव, राहुल कुमार एवं शिक्षा सेवक सेमल कुमार राय पूरी निष्ठा के साथ विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। सभी शिक्षक समय पर विद्यालय पहुंचकर नियमित रूप से पठन-पाठन सुनिश्चित करते हैं।
विद्यालय में विद्यार्थियों के बीच पाठ्यपुस्तक, स्कूल बैग, पानी की बोतल एवं एफएलएन किट का वितरण किया गया है। साथ ही बिजली, पंखा, ब्लैकबोर्ड का नवीनीकरण, रनिंग वाटर, पुस्तकालय, खेल सामग्री, दिव्यांग रैंप, फर्नीचर और स्वच्छ शौचालय जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। विद्यार्थियों को प्रतिदिन गुणवत्तापूर्ण मध्याह्न भोजन भी उपलब्ध कराया जाता है।
प्रधानाध्यापक श्रीधर पाण्डेय ने बताया कि उनके कार्यकाल में विद्यालय परिसर में रसोईघर, शौचालय, चारदीवारी, समरसेबल, मोटरयुक्त पेयजल व्यवस्था, भवन का जीर्णोद्धार, रंग-रोगन, फर्नीचर एवं अन्य विकास कार्य कराए गए हैं। विद्यालय में पोषण वाटिका भी विकसित की गई है तथा शिक्षकों द्वारा टीएलएम (Teaching Learning Material) का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है।
हालांकि उन्होंने विद्यालय की कुछ आवश्यकताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि विद्यालय में चार अतिरिक्त कक्षाओं का निर्माण, स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, पुस्तकालय का विस्तार तथा कक्षा 6 से 8 के लिए हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू और सामाजिक विज्ञान विषय के शिक्षकों की नियुक्ति हो जाए, तो विद्यार्थियों को और बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिल सकेंगी। साथ ही परिसर में मिट्टी भराई और ईंट सोलिंग से जल निकासी की समस्या का भी स्थायी समाधान हो जाएगा।





