बरहेट प्रखंड परिसर में पशुपालन विभाग की ओर से कुक्कुट पालन योजना के तहत चयनित लाभुकों को चूजे, दाना, दवा और अन्य उपकरण वितरित किए गए। प्रमुख बर्नार्ड मरांडी, उप प्रमुख रूपक साह और पशुपालन पदाधिकारी डॉ. दीपक कुमार ने संयुक्त रूप से लाभुकों को ये सामग्रियां सौंपीं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें स्वरोजगार के माध्यम से अतिरिक्त आय का साधन उपलब्ध कराना है।
आत्मनिर्भरता की ओर कदम: बरहेट में कुक्कुट पालन का शुभारंभ
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए सरकार की कुक्कुट पालन योजना एक अहम भूमिका निभा रही है। सोमवार को बरहेट प्रखंड परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम में पशुपालन विभाग द्वारा चयनित लाभुकों को कुक्कुट पालन से संबंधित सभी आवश्यक सामग्री प्रदान की गई।
लाभुकों को मिली पूर्ण सहायता
पशुपालन विभाग की ओर से हर लाभुक को केवल चूजे ही नहीं, बल्कि उनके पालन-पोषण के लिए जरूरी सामग्री भी दी गई, जिसमें शामिल हैं:
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गुणवत्तापूर्ण चूजे: स्वस्थ और उन्नत नस्ल के चूजे।
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दाना (Feed): शुरुआती पोषण के लिए पर्याप्त आहार।
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दवाइयां: समय पर टीकाकरण और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए दवाएं।
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उपकरण: पानी पीने के बर्तन और अन्य आवश्यक सामान।
स्वरोजगार को विकसित करने की अपील
कार्यक्रम के दौरान प्रखंड प्रमुख बर्नार्ड मरांडी ने लाभुकों को विशेष दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन चूजों को तुरंत बेचने के बजाय इनका पालन-पोषण कर इन्हें अपनी आजीविका का स्थायी जरिया बनाएं। उन्होंने कहा, “सरकार की मंशा है कि ग्रामीण क्षेत्रों के परिवार केवल मजदूरी पर निर्भर न रहकर स्वयं के छोटे व्यवसायों से जुड़ें। कुक्कुट पालन कम निवेश में अधिक लाभ देने वाला स्वरोजगार है।”
प्रशासन की सक्रियता
इस वितरण कार्यक्रम में उप प्रमुख रूपक साह और प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी डॉ. दीपक कुमार ने लाभुकों को वैज्ञानिक तरीके से कुक्कुट पालन करने की तकनीक भी समझाई। पशुपालन विभाग द्वारा समय-समय पर लाभुकों को तकनीकी सहायता और स्वास्थ्य परामर्श देने का भी आश्वासन दिया गया। इस पहल से क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं और महिलाओं में स्वरोजगार के प्रति काफी उत्साह देखा जा रहा है।





