हिंदू समाज पार्टी के राष्ट्रीय संरक्षक संजीव कुमार सिंह ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भारत विश्व बैंक का सबसे बड़ा कर्जदार बन गया है, जो देश के लिए चिंताजनक है। पार्टी ने केंद्र और राज्य सरकारों से मुफ्त की योजनाओं और जातिगत अनुदान पर ‘श्वेत पत्र’ जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के आड़ में बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार हो रहा है।

बढ़ते कर्ज और मुफ्त योजनाओं पर घिरी सरकार: हिंदू समाज पार्टी ने उठाए सवाल
नई दिल्ली में हिंदू समाज पार्टी के राष्ट्रीय संरक्षक संजीव कुमार सिंह ने देश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भारत, जो अपनी पारंपरिक नैतिकता और मितव्ययिता के लिए जाना जाता था, आज विश्व बैंक का सबसे बड़ा कर्जदार राष्ट्र बन गया है। पार्टी का मानना है कि कर्ज लेकर देश चलाना न केवल सामाजिक रूप से अस्वीकार्य है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को भी अंधेरे में धकेल रहा है।
जनता से सहमति और योजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल
संजीव कुमार सिंह ने केंद्र सरकार से सीधे सवाल किया है कि क्या देश पर इतना भारी कर्ज लादने से पहले जनता से कोई जनमत या सहमति ली गई थी? उन्होंने मुफ्त की दर्जनों योजनाओं और जाति विशेष को दिए जा रहे लाखों-करोड़ों के अनुदानों को भारत को विकसित बनाने की राह में बाधा बताया। पार्टी का आरोप है कि राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के लिए मनमाने ढंग से गैर-जरूरी योजनाओं का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें एस्टीमेट घोटाला और कमीशनखोरी की जड़ें पहले से ही जमी हुई हैं।
युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था पर चिंता
इस बयान में देश की शिक्षा प्रणाली और बेरोजगारी पर भी गहरा दुख व्यक्त किया गया है। हिंदू समाज पार्टी का कहना है कि आज देश में बेरोजगारों की संख्या पूरी आबादी के बड़े हिस्से पर भारी पड़ रही है। छात्रों के जीवन के साथ खिलवाड़ हो रहा है क्योंकि पाठ्यक्रम रोजगारपरक नहीं है और परीक्षा प्रणाली भ्रष्टाचार के दलदल में फंसी हुई है। तीस वर्षों तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी युवा श्रम बाजार में खुद को अक्षम पा रहे हैं।
राष्ट्रीय रणनीति में बदलाव की आवश्यकता
अंत में, हिंदू समाज पार्टी ने स्पष्ट किया कि भारत के संचालन और राज्यों की विकास रणनीति में मूलभूत कमियां हैं। देश धीरे-धीरे आर्थिक संकट के दलदल में फंसता जा रहा है। सरकार से मांग की गई है कि वह मुफ्त की राजनीति और कर्ज के जाल के बजाय एक ठोस ‘राष्ट्रीय रणनीति’ पर काम करे और श्वेत पत्र जारी कर जनता को बताए कि इन योजनाओं के लिए धन कहां से आ रहा है। पार्टी ने चेताया है कि यदि नीतियां नहीं बदली गईं, तो देश का आर्थिक ढांचा चरमरा सकता है।





