सहरसा। ब्रज किशोर ज्योतिष संस्थान एवं फाउंडेशन, डॉ. रहमान चौक सहरसा के संस्थापक और मिथिला के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित तरुण झा ने बताया कि विश्वविद्यालय पंचांग के अनुसार इस वर्ष हरितालिका तीज व्रत और मिथिला का विशिष्ट पर्व चौठचंद्र पूजा 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा करना शुभ माना जाता है। साथ ही इसी दिन भगवान वराह के अवतार दिवस की भी मान्यता है।
पंडित तरुण झा के अनुसार हरितालिका तीज के दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और संतान की मंगलकामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं और पूजा के दौरान हरितालिका तीज की व्रत कथा का पाठ भी किया जाता है। उन्होंने बताया कि तृतीया तिथि में सुबह 7:28 बजे तक डाली भरना श्रेष्ठ माना गया है। इसके बाद उदया तिथि के अनुसार सूर्यास्त तक डाली भरी जा सकती है।
उन्होंने बताया कि मिथिला में भाद्र शुक्ल पक्ष चतुर्थी को मनाया जाने वाला चौठचंद्र पर्व चंद्र देव की आराधना का विशेष त्योहार है। जिस तरह सूर्य देव की उपासना के लिए छठ पर्व मनाया जाता है, उसी तरह चौठचंद्र में चंद्रमा की पूजा की जाती है। इस दिन महिलाएं सुबह से व्रत रखती हैं और शाम को चावल के घोल से पीठार बनाकर अरिपण तैयार करती हैं। पूजा में खीर, मिठाई और विभिन्न प्रकार के पकवानों के साथ फलों का भी भोग लगाया जाता है।
पंडित तरुण झा ने बताया कि चौठचंद्र पूजा में छाछी के दही का विशेष महत्व है। संध्या बेला में चंद्रमा की पूजा के बाद पकवानों और फलों की डाली तथा छाछी वाले दही को चंद्र देव को अर्पित किया जाता है। मिथिला में यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ लोक परंपरा और संस्कृति से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।





